प्रस्तावना:
जिस गाड़ी को इंसान बच्चे की तरह संभालता है, उसके ईंधन पर सवाल पूछना उसका अधिकार है
सुबह काम पर जाने के लिए गाड़ी निकाली। पहले उसी CNG में गाड़ी 210+ किलोमीटर तक चल जाती थी। अब किसी वाहन मालिक को 150/135 या उससे भी कम किलोमीटर की range दिखाई दे रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती लागत से बचने के लिए सालों पहले CNG गाड़ी खरीदी थी, लेकिन अब अगर mileage ही कम होने लगे तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्योंकि आम आदमी के लिए गाड़ी सिर्फ एक मशीन नहीं होती।
किसी ने अपनी कई साल की बचत लगाकर कार खरीदी है। किसी ने बच्चों की फीस रोककर down payment किया होगा। किसी ने loan की EMI भरते-भरते गाड़ी को अपना साथी बनाया है। कोई रोज उसी गाड़ी से नौकरी पर जाता है, कोई बच्चों को स्कूल छोड़ता है, कोई मरीज को अस्पताल ले जाता है और कोई अपनी छोटी-सी दुकान या business चलाने के लिए उसी वाहन पर निर्भर है।
इसलिए जब CNG में Compressed Biogas यानी CBG blending की बात आती है, तो आम ग्राहक का सवाल केवल इतना नहीं है कि “गोबर से गैस बनाना अच्छा है या बुरा?”
असल सवाल है—
- इस बदलाव का फायदा किसे मिलेगा?
- इसकी लागत कौन उठाएगा?
- अगर mileage कम हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
- CNG की कीमत कम होगी या नहीं?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या आम CNG वाहन मालिक को पूरी जानकारी और पारदर्शिता मिलेगी?
6 अगस्त 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹23,731 करोड़ के outlay के साथ GOBARdhan की National Circular Bioenergy Scheme को मंजूरी दी। इसके तहत CBG production को बढ़ाने, assured offtake, pricing, capital assistance और pipeline connectivity जैसी व्यवस्थाओं की बात की गई है। सरकार के अनुसार CNG (Transport) और PNG (Domestic) segments में CBG blending obligation FY 2026-27 में 3%, FY 2027-28 में 4% और FY 2028-29 से 5% होगा।
अब सवाल यह है कि इस पूरी व्यवस्था में आम CNG ग्राहक की जगह कहां है?
CBG क्या है और इसे CNG में क्यों मिलाया जा रहा है?
CBG का पूरा नाम Compressed Biogas है। इसे cattle dung यानी गोबर, agricultural residue, municipal organic waste और दूसरे जैविक कचरे से बनाया जा सकता है।✅
सरल भाषा में समझें तो—
जैविक कचरा → Biogas → purification → methane-rich gas → compression → CBG
सरकार CBG को देश में domestic fuel production बढ़ाने, imported natural gas पर निर्भरता कम करने और waste-to-energy ecosystem विकसित करने के साधन के रूप में देख रही है।
सरकारी दस्तावेज के अनुसार भारत अपनी natural gas requirement का लगभग 50% imports से पूरा करता है। इसी कारण domestic gas sources बढ़ाने को energy security से जोड़ा जा रहा है।
कागज पर इसका logic समझ में आता है। लेकिन आम ग्राहक का सवाल भी उतना ही जरूरी है—
अगर देश के लिए फायदा है, तो ग्राहक के लिए फायदा क्या है?
क्या CBG को CNG में मिलाना सच में शुरू हो चुका है?
हाँ, blending obligation शुरू हो चुका है।
केंद्र सरकार ने CBG के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए CNG और घरेलू PNG में इसकी हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाने की योजना बनाई है।
| Financial Year | CBG Blending Obligation |
|---|---|
| FY 2025-26 | 1% |
| FY 2026-27 | 3% |
| FY 2027-28 | 4% |
| FY 2028-29 onward | 5% |
यह CNG (Transport) और PNG (Domestic) segments के लिए निर्धारित trajectory है। लेकिन यहां एक जरूरी clarification है।
3% blending obligation का मतलब यह नहीं है कि हर CNG pump पर हर समय ठीक 3% CBG ही मिल रही है। यह एक policy-level obligation/trajectory है, जिसके तहत CGD entities को निर्धारित मात्रा में CBG procurement/blending व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है। इसलिए किसी particular शहर या pump पर actual gas composition जानने के लिए अलग measurement चाहिए।
फिर ₹23,731 करोड़ की GOBARdhan योजना का क्या मतलब है?
6 अगस्त 2026 को Cabinet ने GOBARdhan की National Circular Bioenergy Scheme को मंजूरी दी। इसका कुल outlay ₹23,731 करोड़ है और implementation period FY 2026-27 से FY 2035-36 बताया गया है।
योजना में कई चीजें शामिल हैं—
- CBG producers के लिए assured offtake
- CBG के लिए stable pricing framework
- eligible projects को capital assistance
- pipeline infrastructure
- financing support
- CBG production को बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना
सरकार का लक्ष्य domestic CBG production को लगभग दस गुना बढ़ाना बताया गया है।
अब यह भी देख लेते हैं कि CBG और City Gas के इस पूरे कारोबार में कौन-कौन से बड़े नाम सक्रिय हैं।
पहला नाम है Torrent Gas Private Limited, जिसका नाम electoral bonds के जरिए राजनीतिक चंदे के मामले में भी सामने आया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार Torrent Group से जुड़े electoral bonds में ₹137 करोड़ BJP को मिले थे।
दूसरा नाम है Banas Dairy। इसके chairman शंकर चौधरी हैं, जो BJP के वरिष्ठ नेता होने के साथ गुजरात विधानसभा के Speaker भी हैं। Banas Dairy ने भी Bio-CNG और bioenergy से जुड़े projects में कदम बढ़ाया है।
और अब आता है सबसे चर्चित नाम—Adani Total Gas। Adani Group की company भी CBG और City Gas के क्षेत्र में सक्रिय है।
अब असली सवाल यह है—CBG के इस बढ़ते कारोबार और सरकारी policy support से आखिर किसे कितना आर्थिक फायदा मिल रहा है, और आम CNG वाहन मालिक को इसका क्या लाभ मिलेगा?
- क्या CBG मिलाने के बाद CNG सस्ती हो जाएगी?
- या फिर mileage में आम जनता का पसीना निकाल देगी?
यही transparency का असली मुद्दा है।
क्या CBG मिलाने से CNG कार का mileage 10–20% कम हो जाएगा?
यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध ग्राहक की जेब से है। सोशल मीडिया और ground-level discussions में कुछ वाहन मालिक mileage कम होने की बात करते हैं। कुछ लोग इससे भी बड़ी गिरावट की बात करते हैं।
लेकिन यहां हमें दो चीजें अलग रखनी होंगी।
पहली बात: लोगों का अनुभव
230+ से 135+ km का मतलब लगभग 30/35% range reduction है।
इतनी बड़ी गिरावट को गंभीरता से जांचना चाहिए।
दूसरी बात: scientific evidence
दूसरी तरफ उपलब्ध vehicle testing में CNG और CBG की fuel economy को comparable पाया गया है। SAE की एक experimental study में BS-VI compliant passenger car और three-wheeler पर commercial CBG तथा commercial CNG की तुलना की गई और fuel economy, power तथा acceleration comparable पाए गए।
इसलिए अभी यह कहना factual नहीं होगा कि— सिर्फ 3% CBG मिलाने से गाड़ी का mileage 10–20% तक गिरना निश्चित है”—ऐसा दावा बिना ठोस परीक्षण और विश्वसनीय आंकड़ों के नहीं किया जा सकता।
ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए real-world, independent और large-scale testing चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि ग्राहक की शिकायत को नजरअंदाज किया जाए।
सही रास्ता है—मापो, जांचो और फिर जवाब दो।
NOTE: सबसे जरूरी बात है transparency, ताकि आम जनता को सरकार के फैसलों पर भरोसा और सम्मान महसूस हो। ऐसा न हो कि आम जनता को यह लगे कि अपने धनी उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए उनकी गाड़ियों और उनकी जेब से जुड़ी नीतियों के साथ समझौता किया जा रहा है।
अगर किसी की CNG गाड़ी 250+ km से सिर्फ 135 km चल रही है तो क्या हो सकता है?
यहां कई संभावनाएं हो सकती हैं।
1. CNG कितने kg भरी गई?: केवल यह बताना कि गाड़ी में “फुल टैंक” CNG भरवाई गई थी, वास्तविक खपत और mileage समझने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है।
और उसके बाद— कितने km चले?
इसलिए अगर किसी ग्राहक को अचानक बड़ा mileage drop दिखाई देता है तो gas quality की जांच का सवाल उठना जायज है।
- CNG injector
- regulator
- filter
- spark plugs
- sensors
- gas leakage
- tuning
- tyre pressure
जैसी चीजें भी fuel consumption बदल सकती हैं।
आम जनता का पहला सवाल: अगर blending इतनी अच्छी है तो CNG सस्ती क्यों नहीं हो रही?
यह शायद सबसे सीधा consumer question है। अगर CBG domestic waste से बन रही है, imported natural gas dependency कम करने में मदद कर रही है और एक नया domestic energy source तैयार हो रहा है, तो—
क्या इसका लाभ CNG customer को कम कीमत के रूप में मिलेगा?
अगर नहीं मिलेगा तो क्यों? सरकार ने GOBARdhan framework में CBG producers के लिए administered price ₹2,110/MMBTU यानी लगभग ₹105/kg CBG बताया है। सरकार ने यह भी कहा है कि यह producer को मिलने वाला procurement price है, सीधे CNG consumer का retail price नहीं। इसलिए केवल CBG procurement price देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि CNG की retail price उतनी ही बढ़ेगी।
लेकिन consumer का सवाल फिर भी बना रहता है—
- Final CNG price में blending की लागत कितनी है?
- उसका असर प्रति किलो CNG पर कितना है?
- और अगर future में CBG का हिस्सा 5% तक पहुंचता है, तो consumer की जेब पर कितना असर पड़ेगा?
- क्या इस पूरी व्यवस्था में सिर्फ कंपनियों का ही मुनाफा बढ़ेगा, या कभी आम जनता की जेब और उसके हितों के बारे में भी गंभीरता से सोचा जाएगा?
इन सवालों का जवाब transparent calculation के साथ public होना चाहिए।
आम जनता का दूसरा सवाल: अगर फायदा है तो उसका हिस्सा ग्राहक को क्यों नहीं?
CBG ecosystem में producer, CGD company, gas infrastructure, government support और consumer—कई stakeholders हैं। GOBARdhan scheme में CBG producers को assured demand, pricing framework और capital assistance जैसी व्यवस्थाएं दी जा रही हैं।
लेकिन आम CNG वाहन मालिक यह पूछ सकता है—
“अगर मैं हर महीने अपनी जेब से CNG खरीदने का खर्च उठा रहा हूं, तो CBG blending से होने वाले लाभ में आम CNG वाहन मालिक का हिस्सा क्या है? क्या इसका कोई सीधा फायदा हमें कम कीमत, बेहतर mileage या किसी अन्य रूप में मिलेगा?”
क्या उसे—
- कम CNG price मिलेगी?
- बेहतर fuel availability मिलेगी?
- stable pricing मिलेगी?
- बेहतर mileage मिलेगा?
- क्या सच में इस mixed fuel से आम जनता को फायदा होगा?
आम जनता का तीसरा सवाल: अगर mileage कम हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?
क्या यह vehicle problem है या fuel quality problem?
और अगर fuel quality issue है तो—किसकी जिम्मेदारी है?
इसीलिए एक transparent complaint mechanism जरूरी है।
ग्राहक को सिर्फ यह नहीं कहा जाना चाहिए कि— “गाड़ी में problem होगी।”
और दूसरी तरफ बिना testing यह भी नहीं कहा जाना चाहिए कि— “CBG की वजह से mileage कम हुई है।”
सही तरीका है:
Fuel sample → laboratory test → vehicle diagnosis → consumption test → result
यानी आरोप नहीं, evidence-based जांच।
आम जनता का चौथा सवाल: अगर CBG blending से फायदा है तो CNG की कीमत में उसका फायदा दिखाई क्यों नहीं देता?
यह सवाल बिल्कुल अलग है।
“क्या इससे long term में CNG की cost कम होगी?”
- अगर हां, तो उसका benefit कब और किस mechanism से customer तक आएगा?
- और अगर नहीं, तो policy से मिलने वाला आर्थिक लाभ कहां जा रहा है?
यह सवाल किसी सरकार के पक्ष या विरोध का सवाल नहीं है। यह consumer transparency का सवाल है।
आम जनता का पांचवां सवाल: क्या गोबर गैस से बनी CBG वास्तव में CNG जैसी है?
यहां भी “गोबर गैस” शब्द से भ्रम पैदा हो सकता है। सीधे raw biogas को CNG vehicle में डालना और purified, compressed, specification-compliant CBG को vehicle fuel के रूप में इस्तेमाल करना एक ही बात नहीं है।
CBG production में purification और quality control की जरूरत होती है। एक technical study में commercial CBG का automotive use test किया गया था और उसमें CNG के मुकाबले vehicle performance तथा fuel economy comparable पाई गई। इसलिए केवल “गोबर से बनी है” कहकर यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि वह अनिवार्य रूप से खराब fuel है।
लेकिन equally important बात यह है कि हर commercial fuel की quality specification और actual supply quality दोनों verify होनी चाहिए।
कंपनियों को फायदा, आम CNG मालिक को नुकसान — क्या यह निश्चित है?
यह बात भी बिना evidence के fact की तरह नहीं कही जा सकती।
CBG ecosystem में private investment, producers, CGD entities और infrastructure developers को आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। GOBARdhan scheme खुद assured offtake, stable pricing और investment को बढ़ावा देने की बात करती है। लेकिन इसका यह मतलब अपने-आप नहीं निकलता कि आम CNG ग्राहक को नुकसान ही होगा।
यही वह जानकारी है जो आम जनता को चाहिए।
अगर mileage 10–20% कम हो रहा है तो क्या करना चाहिए?
सबसे पहले panic नहीं करना चाहिए। अपनी गाड़ी का fuel log बनाएं।
उदाहरण:
| Filling | CNG (kg) | Distance | Mileage |
|---|---|---|---|
| 1 | 10 kg | 200 km | 20 km/kg |
| 2 | 10 kg | 180 km | 18 km/kg |
| 3 | 10 kg | 160 km | 16 km/kg |
अगर लगातार कई fillings में mileage गिरता है तो मामला ज्यादा गंभीर है।
इसके साथ—
- Same pump पर filling करें।
- Filling quantity का bill रखें।
- Tyre pressure समान रखें।
- AC/route conditions note करें।
- Vehicle service और CNG system check करवाएं।
- अलग-अलग CNG stations का comparison करें।
- जरूरत पड़ने पर fuel quality की independent जांच की मांग करें।
इस तरह आपकी शिकायत सिर्फ “मुझे mileage कम लग रही है” नहीं रहेगी। आपके पास data होगा।
CNG वाहन मालिक को कौन-से सवाल पूछने चाहिए?
आम ग्राहक ये सवाल सीधे पूछ सकता है:
1. मेरे क्षेत्र में CBG blending कब से लागू हुई?
2. वर्तमान में blending का वास्तविक प्रतिशत कितना है?
3. CBG की quality specification क्या है?
4. CNG की final retail price में blending cost कितनी शामिल है?
5. अगर blending से लागत कम होती है तो उसका benefit customer को कब मिलेगा?
6. अगर mileage में बड़ी गिरावट आती है तो शिकायत कहां की जाएगी?
7. Fuel quality की independent testing कौन करेगा?
8. CBG blending के पहले और बाद में average vehicle fuel economy का verified data कहां उपलब्ध है?
ये सवाल किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं हैं। ये consumer transparency के सवाल हैं।
क्या सरकार को CBG blending बंद कर देनी चाहिए?
इसका जवाब भावनाओं से नहीं, data से तय होना चाहिए।
अगर CBG से—
- waste management बेहतर होता है,
- domestic fuel production बढ़ता है,
- imported gas dependence घटती है,
- किसानों और rural economy को नया market मिलता है,
- और vehicle performance सुरक्षित रहती है,
तो policy के ये संभावित फायदे हैं।
लेकिन दूसरी तरफ अगर—
- fuel quality में variation होता है,
- consumer cost बढ़ती है,
- mileage वास्तव में गिरती है,
- या companies को फायदा और consumers को अतिरिक्त burden मिलता है,
तो उन समस्याओं को भी सामने लाना जरूरी है।
इसलिए सवाल “CBG अच्छी है या बुरी?” से आगे जाना चाहिए।
सही सवाल है—
“CBG blending का वास्तविक फायदा, वास्तविक खर्च और वास्तविक असर क्या है?”
सरकार और CNG कंपनियों से आम जनता को क्या transparency चाहिए?
आम ग्राहक बहुत बड़ी मांग नहीं कर रहा। वह केवल चाहता है कि information साफ हो।
1. Blending data public हो: किस CGD network में कितना CBG blend हो रहा है, इसकी जानकारी उपलब्ध हो।
2. Quality testing transparent हो: Fuel quality standards और test results को accessible बनाया जाए।
3. Price impact बताया जाए: Consumer को समझाया जाए कि blending से प्रति kg CNG पर कितना financial impact पड़ता है।
4. Mileage complaints की जांच हो: अगर हजारों consumers समान समस्या report करते हैं तो systematic investigation हो।
5. Independent testing हो: सिर्फ supplier या company की internal testing पर निर्भर रहने के बजाय independent laboratories की भूमिका हो।
6. Consumer को जवाब मिले: अगर ग्राहक की गाड़ी की mileage अचानक गिरती है तो उसे केवल vehicle fault बताकर मामला बंद न किया जाए।
एक आम आदमी की गाड़ी सिर्फ गाड़ी नहीं होती
इस पूरे मुद्दे को समझने के लिए हमें उस आदमी को याद रखना होगा जो रोज अपनी CNG car/ petrol car लेकर निकलता है।उसके लिए 1 km का फर्क भी मायने रखता है। अगर रोज 50 km चलने वाले व्यक्ति की fuel cost बढ़ती है तो महीने के अंत में वह रकम छोटी नहीं होती।
- और अगर taxi driver है तो उसकी income सीधे fuel consumption से जुड़ी है।
- अगर delivery worker है तो उसका profit fuel cost से प्रभावित होता है।
- अगर middle-class family है तो बच्चों की fees, घर का किराया, बिजली का bill, राशन और EMI पहले से मौजूद हैं।
इसलिए fuel policy का असर सिर्फ “energy sector” का विषय नहीं है। यह घर के monthly budget का भी विषय है।
सबसे जरूरी बात: 220+ km से 135 km वाली शिकायत को कैसे देखें?
अगर कोई व्यक्ति कहता है— “मेरी गाड़ी पहले 210+ km चलती थी और अब 135 km चलती है।” तो उसे तुरंत झूठा कहना गलत होगा।
लेकिन यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि— “यह केवल CBG blending के कारण हुआ है।”
दोनों के बीच सही रास्ता है— Testing.
एक ही vehicle, समान tank quantity, समान route, समान conditions और कई consecutive refills के data से वास्तविक difference निकाला जाना चाहिए। अगर हजारों vehicles में समान pattern मिलता है, तो वह बहुत महत्वपूर्ण evidence होगा। और अगर difference केवल कुछ vehicles में मिलता है, तो vehicle-specific causes भी सामने आ सकते हैं। यही scientific और consumer-friendly approach है।
CBG और CNG Blending से जुड़े 5 बड़े सवाल
फिर—
- filling bills संभालें,
- same pump पर कई बार test करें,
- vehicle का CNG system check करवाएं,
- tyre pressure और driving conditions समान रखें,
- और लगातार abnormal result मिलने पर fuel quality की जांच की मांग करें।
तर्क: data के साथ की गई consumer complaint ज्यादा मजबूत होती है।
निष्कर्ष: सवाल पूछना देश के खिलाफ होना नहीं है
CBG और GOBARdhan को लेकर सरकार ने energy security, waste-to-energy, rural economy और domestic fuel production जैसे लक्ष्य बताए हैं। दूसरी तरफ आम CNG ग्राहक के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल उसकी जेब, mileage, fuel quality और vehicle safety है।
दोनों बातों को एक साथ देखा जाना चाहिए। देश को cleaner और domestic energy sources की जरूरत हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि consumer के सवालों को नजरअंदाज कर दिया जाए।
अगर CBG blending से फायदा है तो— उसका फायदा ग्राहक तक कितना पहुंच रहा है?
अगर लागत बढ़ रही है तो— उसकी वास्तविक लागत कितनी है?
अगर mileage में बदलाव हो रहा है तो— उसका scientific कारण क्या है?
अगर किसी vehicle में 210+ km से 135 km की range हो गई है तो— क्या उसकी independent जांच होगी?
और अगर CNG की कीमत कम नहीं हो रही तो— consumer को इसका स्पष्ट हिसाब क्यों न दिया जाए?
एक आम आदमी अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर गाड़ी खरीदता है। वह उसे केवल मशीन नहीं समझता। वह उसकी service करवाता है, समय पर maintenance करता है, खराब रास्तों पर भी संभालकर चलाता है और कई बार उसी गाड़ी के भरोसे अपने परिवार की जरूरतें पूरी करता है।
इसलिए जब fuel policy बदलती है तो उसके सवालों का जवाब मिलना भी जरूरी है। आम जनता सरकार से लड़ाई नहीं चाहती।
वह सिर्फ इतना चाहती है—
जो policy हमारे पैसे और हमारी गाड़ी को प्रभावित करती है, उसका हिसाब साफ होना चाहिए।
क्योंकि transparency कोई एहसान नहीं है। यह उस नागरिक का अधिकार है जो हर बार अपनी जेब से fuel का पैसा देता है।
और आखिर में एक बात याद रखिए—
सवाल पूछना किसी सरकार के खिलाफ होना नहीं है।
सवाल पूछना अपने हक और अपने पैसे की कीमत समझना है।
अगर CBG blending सच में देश और जनता दोनों के लिए फायदेमंद है, तो उसके फायदे के आंकड़े भी जनता के सामने आने चाहिए। और अगर ground reality में कोई समस्या है, तो उसे छिपाने के बजाय सुधारना चाहिए।
क्योंकि देश की energy policy का असली मतलब तभी पूरा होगा, जब उसका फायदा सिर्फ कागज पर नहीं, आम आदमी की जिंदगी और उसकी जेब में भी दिखाई दे। जैसे 7.8% GDP LOL!!!!😆
यही असली transparency है।
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