प्रस्तावना:
एक लड़की घर से निकली… लेकिन वापस नहीं लौटी। फोन बंद है। परिवार बार-बार कॉल कर रहा है। रिश्तेदारों को फोन किए जा रहे हैं। पुलिस स्टेशन में शिकायत दी जाती है और फिर शुरू होता है उस लड़की को खोजने का सिलसिला।
यह सिर्फ एक खबर नहीं होती।
उस एक लड़की के पीछे एक परिवार होता है, जिसकी रातों की नींद उड़ जाती है। एक मां होती है जो हर फोन की घंटी पर सोचती है कि शायद उसकी बेटी का फोन होगा। एक पिता होता है जो पुलिस स्टेशन, रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के चक्कर लगाता है।
लेकिन सवाल यह है कि
- महाराष्ट्र में आखिर कितनी महिलाएं और लड़कियां लापता होती हैं?
- क्या मुंबई और पुणे में भी ऐसी घटनाएं बड़ी संख्या में सामने आ रही हैं?
- क्या हर Missing Case का मतलब अपहरण या अपराध होता है?
- महिलाओं के लापता होने के पीछे कौन से Patterns दिखाई देते हैं?
और सबसे जरूरी सवाल—
हमारी बेटियां और महिलाएं खुद को ज्यादा सुरक्षित रखने के लिए क्या कर सकती हैं?
इस लेख में हम इन्हीं सवालों को डर फैलाए बिना, उपलब्ध सरकारी और पुलिस आंकड़ों के आधार पर समझने की कोशिश करेंगे।
महाराष्ट्र में कितनी महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं?
सबसे पहले उस आंकड़े को समझते हैं जिसने काफी लोगों का ध्यान खींचा है। महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग की ओर से फरवरी 2026 में विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार 2024 और 2025 के दौरान महाराष्ट्र में 93,940 महिलाओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई।
इनमें:
- 2024 में 45,662 महिलाएं लापता दर्ज हुईं।
- इनमें से 30,877 महिलाएं ट्रेस हुईं।
- 2025 में 48,278 महिलाएं लापता दर्ज हुईं।
- इनमें से 36,581 महिलाएं ट्रेस हुईं।
दो साल को मिलाकर: 93,940 महिलाएं लापता दर्ज हुईं और 67,458 महिलाएं ट्रेस हुईं। इसका मतलब यह नहीं है कि 93,940 महिलाएं आज भी गायब हैं। यह Reported Missing Cases का आंकड़ा है। यह अंतर समझना बहुत जरूरी है।
नाबालिग लड़कियों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं
इसी अवधि में महाराष्ट्र में 23,429 नाबालिग लड़कियों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। इनमें से लगभग 18,770 लड़कियां ट्रेस हुईं। यानी नाबालिग लड़कियों के मामलों में भी बड़ी संख्या में बच्चियों को खोज लिया गया।लेकिन जो अभी तक ट्रेस नहीं हुईं, उनके मामले गंभीर चिंता का विषय हैं।
यहां एक बात बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए—
कई मामलों में लड़की या महिला खुद घर छोड़ सकती है। इसके पीछे प्रेम संबंध, पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव, नौकरी, पढ़ाई या दूसरी व्यक्तिगत परिस्थितियां हो सकती हैं। वहीं कुछ मामलों में अपराध या अन्य गंभीर परिस्थितियां भी हो सकती हैं। इसलिए हर मामले की जांच अलग तरीके से होना जरूरी है।
2026 में कितनी महिलाएं लापता हुईं?
यह सवाल बहुत लोग पूछ रहे हैं। लेकिन यहां हमें ईमानदारी से बात करनी होगी। 2026 अभी पूरा नहीं हुआ है।इसलिए महाराष्ट्र के लिए पूरे 2026 का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है। अगर कोई वेबसाइट आज ही यह लिखती है कि “2026 में महाराष्ट्र में इतनी महिलाएं हमेशा के लिए गायब हो गईं”, तो उस दावे को सावधानी से देखना चाहिए।
क्योंकि: Missing Report ≠ हमेशा के लिए गायब और Missing Report ≠ Kidnapping साबित होना
सरकारी आंकड़ों में Missing Persons की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा व्यक्ति को ट्रेस करने की प्रक्रिया भी चलती है। इसलिए किसी भी आंकड़े को समझते समय यह देखना जरूरी है कि:
कितने लोग महिलाएं Missing Report हुए और क्या अपराधियों की नजर में किसी की बेटी या बहन की जिंदगी और इज्जत की कोई कीमत नहीं रह जाती?
पुणे में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति क्या है?
पुणे महाराष्ट्र का एक बड़ा शिक्षा और रोजगार केंद्र है। देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा पढ़ाई और नौकरी के लिए पुणे आते हैं। ऐसे शहर में लोगों का लगातार आना-जाना होता है और इसलिए Missing Person के मामले भी सामने आते हैं।
2026 में सामने आई पुणे पुलिस की जानकारी के अनुसार 2020 से पांच साल की अवधि में पुणे में 12,369 महिलाओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई।
इनमें: 176 महिलाएं अभी भी Untraced थीं।
इसी अवधि में: 3,388 लड़कियां लापता दर्ज हुईं।
इनमें से: 126 लड़कियां अभी भी Untraced थीं।
पुणे पुलिस ने ऐसे मामलों को खोजने के लिए Operation Muskaan जैसी विशेष मुहिम का इस्तेमाल किया। इसमें पुलिस द्वारा CCTV, रिश्तेदारों, दोस्तों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और दूसरी संभावित जगहों की जानकारी की जांच की जाती है। कुछ मामलों में प्रेम संबंध, पारिवारिक विवाद और दूसरी व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर Missing Case का कारण एक जैसा है।
पुणे में मई 2026 के शुरुआती 22 दिनों के दौरान 123 महिलाओं और लड़कियों के लापता होने की खबर सामने आई। हालांकि, लापता होने की शिकायत को सीधे अपहरण या अपराध मान लेना सही नहीं है, क्योंकि हर मामले की जांच अलग-अलग होती है।
मुंबई में क्या स्थिति है?
मुंबई देश का सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र है। यहां हर दिन लाखों लोग काम, पढ़ाई और दूसरे कारणों से यात्रा करते हैं। मुंबई पुलिस अपनी वेबसाइट पर Missing Persons की जानकारी उपलब्ध कराती है। वहां महिलाओं और नाबालिग लड़कियों से संबंधित Missing Person की अलग-अलग entries भी दिखाई देती हैं।
लेकिन यहां भी एक महत्वपूर्ण बात है।
2026 में अब तक मुंबई से कितनी महिलाएं और लड़कियां कुल मिलाकर लापता हुईं और उनमें से कितनी अभी Untraced हैं—इसका एक पूरा और अंतिम आधिकारिक consolidated आंकड़ा उपलब्ध हुए बिना कोई संख्या बताना सही नहीं होगा।
इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाले: “मुंबई में रोज इतनी लड़कियां गायब होती हैं” या “हर महीने हजारों लड़कियां गायब हो रही हैं” जैसे दावों को बिना सरकारी स्रोत के सच नहीं मानना चाहिए।
क्या भारत महिलाओं के लिए सुरक्षित है?
क्यों? क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा केवल Missing Persons के आंकड़े से तय नहीं होती।
इसके लिए हमें कई चीजों को देखना पड़ता है:
- महिलाओं के खिलाफ अपराध
- अपहरण और Kidnapping
- घरेलू हिंसा
- यौन अपराध
- Cyber Stalking
- Online Harassment
- Human Trafficking
- पुलिस की प्रतिक्रिया
- मामलों की जांच
- न्याय मिलने की स्थिति
- सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा
इसलिए केवल यह देखकर कि कितनी महिलाएं Missing हुईं, पूरे भारत को सुरक्षित या असुरक्षित घोषित करना सही तरीका नहीं है। लेकिन इसका दूसरा मतलब यह भी नहीं है कि हम समस्या को नजरअंदाज करें।
आंकड़े हमें सावधान करते हैं। और जागरूकता हमें बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है।
NOTE: बस पुलिस प्रशासन से मेरी एक ही विनती है कि अगर महिलाओं से जुड़े किसी मामले में कोई आरोपी पकड़ा जाता है, तो उसे किसी बड़े आदमी के फोन या दबाव में आकर छोड़ा नहीं जाना चाहिए। पुलिस को अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाना चाहिए। और अगर किसी आरोपी के पैर में गोली मारने का सिर्फ दिखावा किया गया हो, तो ऐसा नाटक भी नहीं होना चाहिए। ऐसी किसी भी कार्रवाई से आम जनता का पुलिस प्रशासन पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
बिहार के जमुई वाला नंदन का मामला तो याद ही होगा। पुलिस के मुताबिक पैर में गोली लगी थी, लेकिन अगले ही दिन नंदन जी के ठीक से चलते हुए वीडियो को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे थे। आखिर इस मामले की सच्चाई क्या है? क्या यहाँ भी किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश हो सकती है? यहाँ वकांडा का इलाज मुमकिन है भाई। CID वाले प्रद्युम्न की तरह मुझे भी इस मामले में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर महसूस हो रही है।
महिलाओं के लापता होने में कौन से Patterns दिखाई देते हैं?
अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा। आखिर किन परिस्थितियों में महिलाएं और लड़कियां घर से दूर चली जाती हैं? महाराष्ट्र सरकार की विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार महिलाओं के घर छोड़ने के कारणों में प्रेम संबंध, पारिवारिक समस्याएं और मानसिक तनाव जैसे कारणों का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट की गई जानकारी में प्रेम संबंधों का हिस्सा काफी बड़ा बताया गया। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। प्रेम संबंध खुद कोई अपराध नहीं है। एक वयस्क महिला अपनी इच्छा से किसी व्यक्ति के साथ रहना चाहती है तो यह अलग स्थिति है।
हालात उस समय चिंताजनक हो सकते हैं, जब सामने वाला व्यक्ति:
- झूठी पहचान इस्तेमाल करे
- Fake Profile बनाए
- शादी या नौकरी का झूठा वादा करे
- पैसे मांगता रहे
- निजी फोटो मांगकर दबाव बनाए
- परिवार से दूर करने की कोशिश करे
- फोन या Social Media Account को नियंत्रित करे
- मिलने के लिए सुनसान जगह बुलाए
- धमकी या Blackmail करे
इसलिए समस्या सिर्फ “Relationship” नहीं है। समस्या गलत व्यक्ति पर बिना जांच के भरोसा करना हो सकती है।
Pattern 1: Social Media से शुरू होने वाली पहचान
आज Instagram, Facebook और दूसरे Social Media Platforms पर नए लोगों से बात करना सामान्य हो गया है।शुरुआत में बातचीत सामान्य होती है। फिर दोस्ती होती है। फिर सामने वाला व्यक्ति बहुत ज्यादा भरोसा जीतने की कोशिश कर सकता है। इसके बाद वह कह सकता है:
“मुझ पर भरोसा करो।”
“किसी को मत बताना।”
“एक बार अकेले मिलने आओ।”
हर Online Friendship गलत नहीं होती।
लेकिन Online पहचान को वास्तविक पहचान समझ लेना जोखिम भरा हो सकता है। किसी व्यक्ति की Profile Photo, Followers और बातचीत देखकर उसकी पूरी सच्चाई पता नहीं चलती।
इसलिए पहली मुलाकात में:
- Public Place चुनें।
- किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं।
- Live Location Share करें।
- अपनी वापसी की व्यवस्था खुद रखें।
- Personal Documents न दें।
Pattern 2: परिवार में तनाव
कई बार घर का माहौल भी किसी लड़की को इतना परेशान कर सकता है कि वह बिना बताए घर छोड़ने का फैसला कर ले।
इसके पीछे हो सकता है:
- प्रेम संबंध का विरोध
- शादी का दबाव
- पढ़ाई का दबाव
- करियर को लेकर विवाद
- घर में लगातार झगड़ा
- आर्थिक समस्या
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर तनाव
कभी-कभी यह भी पूछना जरूरी है: “तुम परेशान तो नहीं हो?”
बेटी अगर कोई बात बताना चाहती है तो पहले उसकी बात सुनना जरूरी है। हर समस्या का जवाब डांट नहीं होता। कभी-कभी एक शांत बातचीत किसी बड़े फैसले को रोक सकती है।
Pattern 3: Fake Job और रोजगार का लालच
आज हजारों युवा नौकरी के लिए दूसरे शहरों में जाते हैं। कई लड़कियां भी नौकरी के लिए अपने शहर से बाहर जाती हैं। यहीं पर Fake Job Scam का खतरा पैदा हो सकता है। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा:
- “आपको बड़ी Salary मिलेगी।”
- “पहले Registration Fee दो।”
- “हम आपको दूसरे शहर में नौकरी दिलाएंगे।”
- “Accommodation भी हम देंगे।”
जैसी बातें कही जा सकती हैं। इसलिए:
Company Verify करें।
Official Website देखें।
Office Address जांचें।
Offer Letter पढ़ें। और नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।
Pattern 4: अकेले यात्रा करते समय सावधानी
अकेले यात्रा करना गलत नहीं है। लेकिन Safety Planning जरूरी है। अगर आप किसी नए शहर में जा रही हैं तो:
- अपने परिवार को यात्रा की जानकारी दें।
- ट्रेन या बस की जानकारी Share करें।
- Cab/Auto का नंबर भेजें।
- फोन की Battery रखें।
- Emergency Contact तैयार रखें।
- जरूरी Documents की Digital Copy सुरक्षित रखें।
- रात में अनजान जगह पर अकेले जाने से बचें।
- बहुत ज्यादा Personal Information अनजान व्यक्ति को न दें।
Pattern 5: “किसी को मत बताना” वाला व्यवहार
अगर कोई व्यक्ति बार-बार कहता है:
- “हमारे बारे में घरवालों को मत बताना।”
- “अपने दोस्तों से बात मत करो।”
- “फोन मुझे दिखाओ।”
- “Location हमेशा मुझे भेजो।”
- “अगर मुझसे प्यार करती हो तो पैसे भेजो।”
तो इसे सिर्फ प्यार या Care समझना सही नहीं है।
यह Control या Manipulation का संकेत हो सकता है। एक स्वस्थ रिश्ते में भरोसा होता है। लेकिन स्वस्थ रिश्ते का मतलब यह नहीं कि किसी व्यक्ति को आपकी पूरी जिंदगी नियंत्रित करने का अधिकार मिल जाए।
लड़कियां खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
1. Emergency Contacts तैयार रखें: कम से कम 2–3 भरोसेमंद लोगों के नंबर हमेशा रखें। माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त या कोई ऐसा व्यक्ति जिसे जरूरत के समय तुरंत फोन किया जा सके।
2. 112 याद रखें: भारत में 112 Emergency Number है। किसी गंभीर आपात स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. Social Media Privacy मजबूत रखें
अपना:
- घर का पता
- फोन नंबर
- रोज का Travel Route
- Live Location
- Personal Documents
- Banking Details
हर किसी के साथ Share न करें।
4. पहली मुलाकात Public Place में करें: अगर Online मिलने वाले व्यक्ति से पहली बार मिल रही हैं तो: Mall, Cafe या अन्य सार्वजनिक जगह बेहतर विकल्प हो सकता है। किसी सुनसान जगह पर पहली मुलाकात करने से बचें।
अगर कोई निजी फोटो या वीडियो के नाम पर धमकी देता है तो डरकर लगातार पैसे देना समाधान नहीं है।Evidence सुरक्षित रखें और उचित Cyber Crime या Police authority से मदद लें।
अगर कोई महिला या लड़की अचानक लापता हो जाए तो क्या करें?
सबसे जरूरी बात: 24 घंटे इंतजार करने की जरूरत नहीं है कि शायद वह खुद वापस आ जाएगी। अगर परिस्थितियां चिंताजनक हैं तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
परिवार को यह जानकारी तैयार रखनी चाहिए:
- हाल की फोटो
- मोबाइल नंबर
- आखिरी बार कब देखा गया
- किस कपड़े में थी
- आखिरी Location
- किससे बात कर रही थी
- किस वाहन से गई थी
- संभावित Friends/Contacts
- Social Media जानकारी
- कोई मेडिकल या दूसरी जरूरी जानकारी
CCTV फुटेज, Travel Details और दूसरे Digital Clues जल्दी उपलब्ध कराना जांच में मदद कर सकता है। अगर लड़की नाबालिग है तो मामले को और ज्यादा गंभीरता से लेना चाहिए।
क्या Missing का मतलब Kidnapping है?
नहीं। यह बात हर व्यक्ति को समझनी चाहिए। Missing Report का मतलब है कि व्यक्ति उपलब्ध नहीं है और उसके बारे में जानकारी नहीं मिल रही है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- खुद घर छोड़ना
- प्रेम संबंध
- पारिवारिक विवाद
- नौकरी
- पढ़ाई
- मानसिक तनाव
- दुर्घटना
- संपर्क टूटना
- अपहरण
- Human Trafficking
- अन्य अपराध
इसलिए किसी व्यक्ति के लापता होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर यह दावा करना कि: “उसका अपहरण हो गया है” बिना प्रमाण के गलत हो सकता है।
93,940 का आंकड़ा देखकर क्या डरना चाहिए?
डरने से ज्यादा समझने की जरूरत है।
93,940 महिलाओं के Missing Reports जरूर गंभीर आंकड़ा है।
लेकिन उसी डेटा में यह भी दिखाई देता है कि:
67,458 महिलाएं Trace हुईं।
नाबालिग लड़कियों के मामलों में भी:
23,429 Missing Reports में से लगभग 18,770 लड़कियां Trace हुईं।
इसका मतलब यह है कि Missing Report और Permanently Missing एक ही चीज नहीं है।
इसलिए आंकड़े को पूरी Context के साथ समझना चाहिए।
माता-पिता के लिए सबसे जरूरी संदेश
काफी नहीं है।
उसे यह भी सिखाएं:
- Fake Profile कैसे पहचानें
- Online Blackmail क्या होता है
- Personal Information क्यों सुरक्षित रखनी चाहिए
- Emergency में किसे फोन करना है
- किसी गलत व्यक्ति से दूरी कैसे बनानी है
- Travel Safety कैसे रखनी है
- पैसे और Banking Information कैसे सुरक्षित रखनी है
- समस्या होने पर घरवालों से बात कैसे करनी है
और सबसे जरूरी—
बेटी को यह भरोसा दें कि गलती होने पर भी वह घर आकर बात कर सकती है।✅
लेकिन अगर उसे पता हो: “मेरे घरवाले पहले मेरी बात सुनेंगे।”
तो वह मुश्किल परिस्थिति में जल्दी मदद मांग सकती है।
5 महत्वपूर्ण FAQs
जागरूकता + परिवार से संवाद + Digital Safety + Travel Safety + Emergency Preparedness + समय पर शिकायत
निष्कर्ष:
हर Missing Number के पीछे एक इंसान है
इसलिए इस मुद्दे को सिर्फ Crime News की तरह नहीं देखना चाहिए।
यह Awareness का विषय है।
मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है।
सुरक्षित समाज वह है जहां:
- शिकायत को गंभीरता से लिया जाए,
- पुलिस समय पर कार्रवाई करे,
- परिवार अपनी बेटियों की बात सुने,
- समाज पीड़ित को दोष न दे,
- और हर लड़की बिना डर के अपने भविष्य के बारे में फैसला ले सके।
हम अपनी जिंदगी में कितनी भी व्यस्तता में क्यों न हों, अपने आसपास की महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को सिर्फ उनकी जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ सकते।
कभी-कभी एक छोटी सी सलाह, एक फोन कॉल, एक सही समय पर दी गई मदद या किसी लड़की की बात बिना जज किए सुन लेना बहुत बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।
अगर आपको यह Awareness जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ Share जरूर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को महिलाओं की सुरक्षा, सावधानी और उनके अधिकारों के बारे में जानकारी मिल सके।
क्योंकि जागरूकता सिर्फ जानकारी नहीं होती—कभी-कभी यही जागरूकता किसी की जिंदगी बदल सकती है।
स्रोत
- महाराष्ट्र गृह विभाग/विधानसभा में प्रस्तुत Missing Women और Minor Girls की जानकारी।
- Ministry of Home Affairs — Missing Persons और Women Safety से संबंधित जानकारी।
- Pune Police से संबंधित Operation Muskaan और Missing Persons की जानकारी।
- Mumbai Police — Official Missing Persons Database।
- Government Emergency Response Support System — 112।
- NCRB Cyber Awareness — Online Safety और Cyber Crime से संबंधित जानकारी।






