RTI से उजागर हुई मुख्यमंत्री सहायता निधि की चौंकाने वाली सच्चाई 106cr
मराठवाड़ा…
एक ऐसा क्षेत्र जहाँ किसान हर साल कभी सूखे से, तो कभी अतिवृष्टि से जूझता है। फसल खराब होती है, कर्ज बढ़ता है और उम्मीदें टूटती चली जाती हैं। ऐसे हालात में जब सरकार और समाज “किसानों की मदद” के नाम पर आगे आते हैं, तो किसान को लगता है कि शायद इस बार हालात बदलेंगे।
RTI - Right to Information / माहितीचा अधिकार
लेकिन सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है।
👉 मराठवाड़ा के किसानों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 106 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हुए
👉 लेकिन किसानों को दी गई वास्तविक मदद – सिर्फ 75,000 रुपये
यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सरकार, व्यवस्था और पारदर्शकता पर खड़े हो रहे गंभीर सवालों की कहानी है।
मुख्यमंत्री सहायता निधि (CM Relief Fund) क्या है?
मुख्यमंत्री सहायता निधि एक ऐसा कोष है, जिसे विशेष रूप से आपातकालीन और मानवीय सहायता के लिए बनाया गया है। इसका उपयोग आमतौर पर इन स्थितियों में होता है:
- प्राकृतिक आपदा (अतिवृष्टि, सूखा, बाढ़)
- किसान संकट
- गंभीर बीमारी
- दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु
इस निधि में पैसा आता है:
- आम नागरिकों से
- सरकारी कर्मचारियों के वेतन से
- विधायकों और मंत्रियों से
- निजी संस्थाओं, ट्रस्ट और कंपनियों से
लोग इसलिए दान करते हैं क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि उनका पैसा जरूरतमंद तक पहुंचेगा।
RTI से क्या खुलासा हुआ? ( माहितीचा अधिकार )
RTI के जरिए मांगी गई जानकारी में जो तथ्य सामने आए, वे हैरान करने वाले हैं।
🔹 कितना पैसा जमा हुआ?
मराठवाड़ा के किसानों की मदद के नाम पर
👉 ₹106 करोड़ से ज्यादा राशि मुख्यमंत्री सहायता निधि में जमा हुई
🔹 कितनी मदद दी गई?
👉 सिर्फ ₹75,000 रुपये ही किसानों को वितरित किए गए
यानी करोड़ों की राशि जमा होने के बावजूद, मदद नाममात्र की रही।
106 करोड़ और 75 हजार – इतना बड़ा अंतर क्यों?
यह सबसे बड़ा सवाल है, जिसका जवाब आज भी साफ नहीं है।
1️⃣ क्या पैसा सिर्फ जमा होकर पड़ा रहा?
RTI के जवाब में बताया गया कि मुख्यमंत्री सहायता निधि से पैसा मुख्यमंत्री के निर्देश के बिना जारी नहीं किया जाता।
2️⃣ क्या पैसा किसी और मद में इस्तेमाल हुआ?
सरकार का तर्क है कि:
- किसानों को अलग-अलग योजनाओं से मदद दी गई
- NDRF / SDRF जैसे फंड से राहत दी गई
लेकिन सवाल यह है कि
👉 अगर CM Fund किसानों के लिए था, तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ?
3️⃣ प्रशासनिक लापरवाही?
- रिपोर्ट और सर्वे में देरी
- फाइलों का लंबा चक्कर
- जिम्मेदारी तय न होना
और इस सबका खामियाजा सीधे किसान को भुगतना पड़ा।
मराठवाड़ा के किसानों की जमीनी हकीकत
मराठवाड़ा का किसान आज:
- भारी कर्ज में डूबा है
- फसल बीमा नहीं मिल रहा
- लागत बढ़ती जा रही है
- बाजार भाव गिर चुके हैं
ऐसे हालात में 75 हजार रुपये की सहायता लाखों किसानों के लिए मजाक जैसी लगती है।
RTI के बाद जनता में गुस्सा क्यों?
जैसे ही RTI की जानकारी सामने आई:
- सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे
- पत्रकारों ने सरकार से जवाब मांगा
- सामाजिक संगठनों ने पारदर्शकता की मांग की
लोगों का सीधा सवाल है:
“अगर पैसा किसानों के लिए जमा हुआ, तो गया कहाँ?”
सरकार की सफाई क्या है?
सरकारी पक्ष का कहना है:
✔ मुख्यमंत्री सहायता निधि तात्कालिक सहायता के लिए है
✔ बड़ी राहत पैकेज अन्य योजनाओं से दिए गए
✔ CM Fund की राशि सीमित मामलों में खर्च की जाती है
लेकिन RTI के आंकड़े और जमीनी हकीकत में भारी अंतर साफ नजर आता है।
RTI – आम आदमी की सबसे बड़ी ताकत
इस पूरे मामले से एक बात साबित होती है:
👉 अगर RTI न होती, तो यह सच्चाई कभी सामने नहीं आती
RTI:
- सरकार से सवाल पूछने का अधिकार देती है
- जनता को जवाबदेही सिखाती है
- लोकतंत्र को मजबूत बनाती है
किसानों को न्याय कैसे मिल सकता है?
✔ फंड का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो
CM Relief Fund का जिला-वार खर्च ऑनलाइन दिखाया जाए
✔ समयबद्ध सहायता
आपदा के 30 दिन के भीतर मदद मिलनी चाहिए
✔ स्वतंत्र ऑडिट
मुख्यमंत्री सहायता निधि का नियमित ऑडिट जरूरी
✔ किसान संगठनों की भागीदारी
निर्णय प्रक्रिया में किसानों की आवाज हो
यह सिर्फ पैसों का मुद्दा नहीं है
यह मामला:
- जनता के भरोसे का है
- किसानों के भविष्य का है
- सरकार की जवाबदेही का है
जब आम आदमी अपनी कमाई से टैक्स देता है, तो वह सिर्फ पैसा नहीं देता, बल्कि सिस्टम पर अपना विश्वास भी देता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. मराठवाड़ा के किसानों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में कितनी राशि जमा हुई?
उत्तर:
RTI से मिली जानकारी के अनुसार मराठवाड़ा के किसानों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में 106 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा हुई थी।
2. RTI के अनुसार किसानों को वास्तव में कितनी मदद दी गई?
उत्तर:
RTI के जवाब में बताया गया कि जमा राशि के मुकाबले सिर्फ 75,000 रुपये की सहायता किसानों को दी गई, जो बेहद कम मानी जा रही है।
3. मुख्यमंत्री सहायता निधि से पैसा जारी क्यों नहीं किया गया?
उत्तर:
सरकारी जवाब के अनुसार मुख्यमंत्री सहायता निधि से राशि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही जारी की जाती है और इसी कारण बड़ी राशि जमा होने के बावजूद वितरण सीमित रहा।
4. क्या किसानों को अन्य सरकारी योजनाओं से मदद मिली?
उत्तर:
सरकार का दावा है कि किसानों को NDRF, SDRF और अन्य कृषि योजनाओं के माध्यम से राहत दी गई, लेकिन RTI में मुख्यमंत्री सहायता निधि से हुई मदद बेहद कम दिखाई गई।
5. RTI से इस मामले का खुलासा क्यों हो पाया?
उत्तर:
क्योंकि सूचना का अधिकार (RTI) आम नागरिकों को सरकारी फंड और खर्च की जानकारी मांगने का कानूनी अधिकार देता है, इसी के कारण मुख्यमंत्री सहायता निधि से जुड़ी यह जानकारी सार्वजनिक हो सकी।
निष्कर्ष (Conclusion)
मराठवाड़ा के किसानों के लिए 106 करोड़ रुपये जमा होना उम्मीद की बात थी, लेकिन उसमें से सिर्फ 75 हजार रुपये की मदद होना सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।
यह लेख:
❌ किसी पार्टी के खिलाफ नहीं
✅ पारदर्शकता और किसानों के हक में है
अगर आज सवाल नहीं पूछे गए, तो कल जवाब भी नहीं मिलेंगे।
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