प्रधान मंत्री Viksit Bharat Yojana (PM-VBRY) — एक समग्र परिचय
भारतीय सरकार ने Pradhan Mantri Viksit Bharat Rozgar Yojana (PM-VBRY) की घोषणा 1 जुलाई 2025 को की, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर औपचारिक रूप से लॉन्च किया।
यह योजना रोजगार सृजन को बढ़ावा देने, युवाओं को पहली नौकरी पाने में मदद करने और formal श्रम बाजार (EPFO) में अधिक लोगों को लाने के लिए डिज़ाइन की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस योजना का बजट लगभग ₹1 लाख करोड़ है, और लक्ष्य है अगले दो सालों (1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027) के अंदर लगभग 3.5 करोड़ नई नौकरियां बनाना।
PM Viksit Bharat Yojana क्यों महत्वपूर्ण है?
नौकरी का मुद्दायुवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है नौकरी। खासकर पहली नौकरी पाना कठिन होता है क्योंकि कई नियोक्ता अनुभव मांगते हैं, और युवा formal सेक्टर में जाने से पहले अस्थिरता महसूस करते हैं। PM-VBRY इस “पहली नौकरी” की बाधा को कम करने की कोशिश करता है।
Formalisation (औपचारिकता)
इस योजना से न केवल नौकरी की संख्या बढ़ेगी, बल्कि formal सेक्टर में लोगों को शामिल किया जाएगा। मतलब, EPFO जैसी संस्थाओं के जरिए उन्हें सामाजिक सुरक्षा, PF आदि मिल सकते हैं। यह देश की आर्थिक संरचना को मजबूत करने में मदद करता है और असंगठित श्रमिकों के लिए सुरक्षा का नया रास्ता खोलता है।
विकसित भारत का विज़न (2047)
यह योजना “विकसित भारत @ 2047” की सरकार की दीर्घकालीन महत्वाकांक्षा से जुड़ी हुई है — यानी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य। सरकारी योजना पोर्टल
नियोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन
सिर्फ युवाओं को नहीं, बल्कि नियोक्ताओं को भी उत्साहित किया गया है कि वे नए लोगों को भर्ती करें और उन्हें लंबे समय तक बनाये रखें। इससे नियोक्ताओं को फायदा होगा और नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे। https://www.oneindia.com
डिजिटल-first अमल
पंजीकरण और भुगतान डिजिटल माध्यमों से होगा — UAN (Universal Account Number) के लिए UMANG ऐप का उपयोग, Face Authentication इत्यादि। इसका मतलब है कम पेपर वर्क, तेज़ प्रोसेस और पारदर्शिता।
PM-VBRY की प्रमुख विशेषताएं
यह योजना मुख्य रूप से दो भागों (Part A और Part B) में विभाजित है:
Part A — पहली नौकरी पाने वालों (First-time Employees)
- वह युवा जो पहली बार EPFO-कवर किए गए नौकरी में शामिल हो रहे हैं, इस योजना में पात्र होंगे।
- जो लोग 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच नौकरी जॉइन करते हैं, वे स्कीम का लाभ ले सकते हैं।
- मासिक वेतन सीमा (joining time) ₹1 लाख तक की नौकरी वाले कर्मचारियों को यह लाभ मिलेगा।
- कर्मचारियों को ₹15,000 तक की प्रोत्साहना राशि दी जाएगी। यह राशि दो किस्तों में होगी: पहली किस्त 6 महीने के बाद और दूसरी किस्त 12 महीने के बाद (या निर्धारित शर्तों के पूरा होने के बाद)।
- दूसरी किस्त पाने के लिए, कर्मचारियों को financial literacy (आर्थिक साक्षरता) का एक शॉर्ट-कोर्स पूरा करना होगा।
- भुगतान Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से किया जाएगा, और आधार लिंक्ड बैंक खाते का उपयोग होगा।
- UAN बनाने के लिए UMANG App में फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग करना होगा।
Part B — नियोक्ताओं (Employers) के लिए प्रोत्साहन
- EPFO-कवर वाले नियोक्ता इस योजना में शामिल हो सकते हैं।
- नियोक्ताओं को प्रति नए कर्मचारी ₹3,000 प्रति महीने तक का प्रोत्साहन मिलेगा, बशर्ते वह कर्मचारी कम से कम 6 महीने तक नौकरी पर बना रहे।
- यह प्रोत्साहन दो साल तक लागू रहेगा, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए यह चार साल तक हो सकता है।
- नियोक्ता को अपने कर्मचारी संख्या में “नेट जॉब क्रिएशन” (अर्थात नए रोजगार बनाना) दिखाना होगा। यदि कर्मचारियों की संख्या 50 से कम है, तो कम-से-कम 2 नए कर्मचारी होने चाहिए, और अगर स्टाफ 50 से ज्यादा है तो कम-से-कम 5 नए।
- भुगतान नियोक्ताओं के PAN-लिंक बैंक खाते में किया जाएगा।
PM Viksit Bharat Yojana का लाभ — किसे और कैसे होगा
कर्मचारियों (कर्मचारी-प्रथम नौकरी)
- नवयुवाओं की वित्तीय मदद: पहली नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को एक तरह की “इनिशियल बूस्ट” मिलती है, जिससे वे अपनी नौकरी की शुरुआत में आर्थिक रूप से थोड़ा सुरक्षित महसूस कर सकते हैं।
- सामाजिक सुरक्षा: EPFO में शामिल होने के कारण, ये युवा भविष्य में PF (Provident Fund) जैसे लाभ पाने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होती है।
- आर्थिक साक्षरता: फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स के ज़रिये उन्हें पैसों को समझने और प्रबंधित करने की कला सिखाने का मौका मिलता है — यह दीर्घकालीन वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है।
- डिजिटल पेमेंट और पारदर्शिता: DBT के जरिये लाभ मिलना और आधार-लिंक बैंक खाता उपयोग करना, योजना को पारदर्शी और जवाबदेह बनाता है।
नियोक्ताओं (Employers)
- नए कर्मचारियों को जोड़ने का प्रोत्साहन: नए भर्ती कर्मचारियों के कारण वे मासिक प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भर्ती की लागत कम होती है।
- लंबे समय तक जुड़े कर्मचारी: चूंकि प्रोत्साहन मिलने की शर्तों में “6 महीने तक बने रहना” शामिल है, नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जिससे प्रशिक्षण और फिर से भर्ती की लागत कम हो सकती है।
- मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चार साल तक प्रोत्साहन देने का विकल्प बड़ी कंपनियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, क्योंकि यह निवेश और विस्तार को बढ़ावा दे सकता है।
- Formal sector expansion: इस योजना के कारण असंगठित या छोटे क्षेत्र के नियोक्ताओं को EPFO-कवर में शामिल होने का बढ़ावा मिलेगा, जिससे formal सेक्टर की बढ़ोत्तरी होगी।
संभावित चुनौतियाँ और जोखिम (Challenges & Risks)
जब कोई बड़ी सरकारी योजना आती है, तो कुछ जोखिम और चुनौतियाँ हमेशा होती हैं। PM Viksit Bharat Yojana में भी इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता:
पंजीकरण और अनुपालन
- नियोक्ताओं को EPFO-कोड और श्रम मंत्रालय की वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा। यह प्रक्रिया छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए विशेष रूप से भारी हो सकती है।
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नियोक्ताओं को “Electronic Challan-cum-Return (ECR)” सही तरह से भरनी होगी; अगर वे गलत डेटा दर्ज करते हैं, तो कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को लाभ नहीं मिल सकता।
- लाभ पाने की पहली किस्त के लिए 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए 12 महीने तक रुकना जरूरी है। कुछ कर्मचारियों के लिए यह कठिन हो सकता है, खासकर अगर नौकरी का वातावरण अनिश्चित हो।
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नियोक्ताओं की अस्थिरता: यदि कंपनी स्थिति या मार्केट की वजह से कर्मचारियों की भर्ती या उन्हें बनाए रखने में विफल रहती है, तो योजना का लाभ सीमित हो सकता है
लाभार्थियों की सीमाएँ
- योजना सिर्फ उन कर्मचारियों को लक्षित करती है जिन्होंने पहले EPFO कवर नहीं किया है (“first-timers”)। इससे कुछ अनुभवी कर्मचारी जो पहले EPFO में हैं, इस योजना का फायदा नहीं उठा पाएंगे। https://www.oneindia.com/
- मासिक वेतन की सीमा (₹1 लाख तक) भी यह तय करती है कि बहुत उच्च वेतन वाले नए कर्मचारी लाभ से बाहर रह सकते हैं।
नीति अमल और निगरानी
- इतनी बड़ी योजना को लागू करने और सही निगरानी करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि डिजिटल पोर्टल सुरक्षित और निर्बाध काम करें।
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भुगतान की प्रक्रिया, DBT, आधार लिंकिंग और अन्य तकनीकी मुद्दों में देरी हो सकती है, जिससे लाभार्थियों का भरोसा घट सकता है।
लाभ की असमानता
- कुछ क्षेत्रों (जैसे बड़े शहरों) में नौकरी का निर्माण जल्दी हो सकता है, जबकि ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में कंपनियों के लिए भर्ती कम आकर्षक हो सकती है। इससे योजना का लाभ असमान रूप से वितरित हो सकता है।
- यदि कंपनियां सिर्फ इन-सेट क्षेत्रों में ज़्यादा भर्ती करती हैं, तो असंगठित क्षेत्रों के युवाओं तक पहुंच सीमित रह सकती है।
PM Viksit Bharat Yojana का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
निवेश और आर्थिक विकास
- नौकरी बढ़ने से मांग-सेंट्रिक विकास को बढ़ावा मिलेगा: जैसे कि घरों, शिक्षा, परिवहन, कंज्यूमर गुड्स आदि में मांग बढ़ सकती है क्योंकि अधिक लोग स्थिर नौकरी और आय प्राप्त करेंगे।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विस्तार को मिलने वाले लंबी अवधि के प्रोत्साहन से उत्पादन और निवेश दोनों बढ़ सकते हैं, जिससे “मेक इन इंडिया” जैसी पहलों को बल मिलेगा।
- पहली नौकरी पाने वाले युवाओं को वित्तीय सहायता और सामाजिक सुरक्षा मिलने से, उनकी आर्थिक स्वावलंबन की स्थिति मजबूत होगी।
- वित्तीय साक्षरता के कोर्स से युवाओं में पैसों की समझ बढ़ेगी — इससे वे बचत, निवेश और भविष्य की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
Formalisation of Labor Force
- असंगठित श्रमिकों का formal सेक्टर में आने का मार्ग खुलेगा, जिससे उन्हें PF, पेंशन और अन्य लाभ मिल सकते हैं।
- Formal workforce बढ़ने से सरकार को श्रम बाजार पर बेहतर निगरानी और नीति निर्माण में मदद मिलेगी
दृष्टि 2047 – विकसित भारत
- यह योजना “विकसित भारत @ 2047” की बड़ी कहानी का हिस्सा है — जब युवा रोजगार में शामिल होंगे, formal सेक्टर बढ़ेगा, और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा, तब यह मिशन मजबूत आधार पाएगा।
- इस प्रकार, PM VBRY न केवल एक रोजगार योजना है, बल्कि एक दीर्घकालीन विकास रणनीति की शुरुआत भी है।
आवेदन प्रक्रिया और कैसे लाभ प्राप्त करें
पंजीकरण
- कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा: PMVBRY के लिए EPFO और श्रम मंत्रालय की साइट पर। Ministry of Labour & Employment
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नियोक्ताओं को EPFO-कोड बनाना होगा और ECR (Electronic Challan-cum-Return) में सही जानकारी दर्ज करनी होगी।
UAN जनरेशन
- कर्मचारियों को UAN (Universal Account Number) जनरेट करना होगा। इसके लिए UMANG App पर फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग करना पड़ता है।
- UAN और बैंक खाते को आधार से लिंक करना होगा (Aadhaar-seeded bank account), ताकि DBT के जरिये लाभ सीधे हस्तांतरित किया जा सके।
Financial Literacy Course
- दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को एक छोटा ऑनलाइन आर्थिक साक्षरता कोर्स पूरा करना होगा। https://www.oneindia.com/
निगरानी और रिपोर्टिंग
- नियोक्ताओं को नौकरी सृजन दिखाने के लिए रिपोर्टिंग करनी होगी (जैसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना, उन्हें 6 महीने से अधिक बनाए रखना)।
- भुगतान प्रक्रिया और अन्य रिकॉर्ड का रखरखाव ज़रूरी होगा, ताकि डीबीटी और अन्य लाभों का सही ऑडिट हो सके।
विख्यात सवाल और जवाब (FAQs)
Q1: क्या हर नौकरी वाला युवा इस योजना में लाभ उठा सकता है?
A: नहीं — इस योजना का प्रमुख लाभ उन युवाओं को है जो पहली बार EPFO-कवर नौकरी ले रहे हैं, और उनकी सैलरी जॉइनिंग टाइम में ₹1 लाख प्रति माह तक होनी चाहिए। https://www.oneindia.com/
Q2: नियोक्ता को कितने कर्मचारियों की भर्ती करनी होगी ताकि वह योजना में शामिल हो सके?
A: यदि कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 50 से कम है, तो उसे कम से कम 2 नए कर्मचारियों को भर्ती करना होगा। यदि कर्मचारियों की संख्या 50 या उससे अधिक है, तो 5 नए कर्मचारियों की भर्ती करनी होगी। https://www.oneindia.com/
Q3: प्रोत्साहन कब और कैसे मिलेगा?
A: कर्मचारी को पहली किस्त 6 महीने के बाद मिलेगी और दूसरी किस्त 12 महीने के बाद, यदि वह आर्थिक साक्षरता कोर्स पूरा करता है। भुगतान DBT (Aadhar-seeded बैंक खाते) के माध्यम से किया जाएगा। नियोक्ताओं को ₹3,000/माह तक की राशि दी जाएगी, बशर्ते कर्मचारी 6 महीने तक बनी रहे और अन्य शर्तें पूरी हों।
Q4: क्या मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को कोई अतिरिक्त फायदा होगा?
A: हाँ, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नियोक्ताओं को चार साल तक का प्रोत्साहन मिल सकता है बजाय सिर्फ दो साल के।
Q5: भुगतान की प्रक्रिया कैसी है?
A: कर्मचारियों को DBT के माध्यम से लाभ मिलेगा। नियोक्ताओं को उनका पैसा उनके PAN-लिंक बैंक खाते में भेजा जाएगा। Ministry of Labour & Employment
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रणनीतिक सुझाव और अनुशंसाएँ
युवा कर्मचारियों के लिए
- इस योजना का लाभ उठाने के लिए नौकरी खोजते समय EPFO-कवर वाली कंपनियों पर विचार करें।
- नौकरी शुरू करते ही UAN बनाएँ और UMANG ऐप पर पंजीकरण करें।
- आर्थिक साक्षरता कोर्स समय रहते पूरा करें ताकि आप दोनों किस्तें ले सकें।
- अपने बैंक खाते को आधार से लिंक करें।
नियोक्ताओं के लिए
- देखें कि आपके स्टाफ स्ट्रक्चर में “नेट जॉब क्रिएशन” कैसे हो सकता है — यानी आप कितने नए कर्मचारी जोड़ सकते हैं और कितने पहले से हैं।
- EPFO पंजीकरण और ECR रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को सरल बनाएं — HR टीम को इस योजना की जानकारी दें और उन्हें प्रशिक्षित करें।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हों तो योजना के चार साल तक चलने वाले प्रोत्साहन का पूरी तरह फायदा उठाने की रणनीति बनाएं।
- भुगतान और ऑडिटिंग के लिए अच्छे रिकॉर्ड रखे, ताकि डीबीटी लाभों में कोई रुकावट न हो।
सरकारी और नीति-निर्माताओं के लिए
- यह महत्वपूर्ण है कि पंचायतों, जिला कार्यालयों और राज्य स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) भी इस योजना का लाभ उठा सकें।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म की क्षमता बढ़ाई जाए ताकि पंजीकरण, भुगतान और रिपोर्टिंग पारदर्शी और आसान हो।
- योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन और समीक्षा हो, ताकि यह देखा जा सके कि क्या लक्ष्य संख्या (3.5 करोड़ नौकरी) हासिल हो रही है और यदि कोई ग़ैरबराबरी है तो उसे दूर किया जाए।
निष्कर्ष
PM Viksit Bharat Rozgar Yojana एक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी योजना है, जो भारत में नौकरी सृजन, युवाओं को पहली नौकरी पाने, formal labour market को बढ़ाने और “विकसित भारत @ 2047” की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी परिवर्तन ला सकता है — क्योंकि यह युवाओं को वित्तीय स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाता है।
हालाँकि चुनौतियाँ भी हैं, जैसे पंजीकरण, अनुपालन, रिटेंशन और लाभों का सही वितरण, लेकिन सही निगरानी, जागरूकता और अमल के साथ, यह योजना भारत के रोजगार परिदृश्य में एक गेम-चेंजर बन सकती है।
अगर आप एक युवा हैं, जो पहली नौकरी पाने की तैयारी में है, या एक नियोक्ता हैं जो अपने स्टाफ को बढ़ाना चाहता है — PM-VBRY आपकी जिंदगी और कारोबार दोनों के लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है।

